अपने ह्रदय को खुद से धड़कने दें

 

रोगी –

डॉ. सा., क्या हम ह्रदय गति रूकने के कारण होने वाली मृत्यु को टाल सकते हैं?

डॉ. –

भगवान या प्रकृति ने हमारे ह्रदय को सिर्फ शुद्ध खून को पम्प करने के लिए डिजाईन किया है.

लेकिन आज हम कई तरह की दवाइयां सालों तक खाकर उससे हुए अशुद्ध रक्त को पम्प करेंगे,

तो निश्चित ही यह ह्रदय या पम्प सही नहीं चलेगा.

हमारा ह्रदय शुद्ध मानव रक्त के संचालन के लिये बना है, लेकिन इंजेक्शन और केप्सूल द्वारा कई तरह की विजातीय औषधियों के रक्त में मिश्रित हो जाने से ह्रदय में दूषित रक्त जाने लगता है, जिससे ह्रदय दुर्बल होता रहता है।

सच्चाई यह है कि हमारा ह्रदय कम से कम सौ साल के लिए धड़कने  के लिए बना है, लेकिन हमारी आधुनिक जीवन-प्रणाली, इंजेक्शन और केप्सूल द्वारा कई तरह की विषैली औषधियों के रक्त में मिलने और नियमित दिनचर्या के अभाव के कारण ह्रदय की दुर्गति होने लगती है.  

रक्त में कोलेस्ट्राल, ब्लड-यूरिया और ब्लड-शुगर आदि की दवाइयों के लेने से भी हार्ट फेल हो जाने की संभावना बन जाती है।

ऐसी स्थिति में रक्त शुद्धि का ध्यान रख कर, खान-पान में सावधानी रखने और नियमित एक्सरसाइज और नियमित जीवन-चर्या से हार्ट फेल का होना टाला जा सकता है और ह्रदय को सुचारू रूप से धड़काया जा सकता है।

अतः हमे चाहिए कि हम हमारे सबसे प्रमुख और हमारे जीवन के आधार-स्तम्भ इस ह्रदय रुपी पंप को दवाई रहित शुद्ध खून को ही पंप करने दें.

कुछ समय पूर्व न्यूज पेपर में आये एक समाचार के अनुसार आजकल चिकित्सा के पेशे में डॉक्टरों ने स्टेंट को कमाई का साधन बना लिया है.वे अक्सर मरीजों की समस्या को बढ़ा-चढ़ा कर बताते हैं. आर्टरी ठीक होने पर भी मरीजों को उसमे चोकिंग बताकर स्टेंट लगा दिया जाता है.

इस तरह से विशेषज्ञों के अनुसार यह स्पष्ट हो जाता है कि आज जिन लोगों की बाईपास सर्जरी या एंजियोप्लास्टी की जा रही है, उनमें से नब्बे प्रतिशत मामले ऐसे होते हैं, जिनमें इनकी जरूरत बिल्कुल नहीं होती है.

कारण यह है कि हमारा ह्रदय शुद्ध मानव रक्त के संचालन के लिये बना है, लेकिन इंजेक्शन और केप्सूल द्वारा कई तरह की विजातीय औषधियों के रक्त में मिश्रित हो जाने से ह्रदय में दूषित रक्त जाने लगता है, जिससे ह्रदय दुर्बल होता रहता है।

रक्त में कोलेस्ट्राल, ब्लड-यूरिया और ब्लड-शुगर नामक विकारों के बढ़ने से भी हार्ट फेल हो जाने की संभावना बन जाती है।

सच्चाई यह है कि हमारा ह्रदय कम से कम सौ साल के लिए धड़कने  के लिए बना है, लेकिन हमारी आधुनिक जीवन-प्रणाली, इंजेक्शन और केप्सूल द्वारा कई तरह की विषैली औषधियों के रक्त में मिलने और नियमित दिनचर्या के अभाव के कारण ह्रदय की दुर्गति होने लगती है.  

ऐसी स्थिति में रक्त शुद्धि का ध्यान रख कर, खान-पान में सावधानी रखने और नियमित एक्सरसाइज और नियमित जीवन-चर्या से हार्ट फेल का होना टाला जा सकता है और ह्रदय को सुचारू रूप से धड़काया जा सकता है।

हर जिम्मेदार व्यक्ति को आजकल इतना ज्यादा कार्य का भार और जिम्मेदारी रहती है कि वह दिन-रात मेहनत करता हुआ अपने स्वास्थ्य की देखभाल नहीं कर पाता है.

अतः सभी तरह की ऑफिस और घर की चिन्ताओं का बोझ लेकर न रहे।

ज्यादातर मरीजों की सिर्फ लाइफ स्टाइल में बदलाव से ही काफी अच्छा रिजल्ट मिल सकता है। कभी-कभी दवाइयां भी प्रेस्क्राइब की जा सकती हैं, पर बाईपास या एंजियोप्लास्टी नहीं।

एंजियोप्लास्टी में डॉक्टर दिल की नली में एक स्प्रिंग डालते है जिसे स्टेंट कहते हैं।

यह स्टेंट अमेरिका में बनता है और इसको बनाने की कुल लागत मात्र 3 डॉलर यानी कि रू. 180/- होती है. इसी स्टेंट को भारत में लाकर एक से दो लाख रूपये में बेचा जाकर आपको लूटा जाता है। डॉक्टर के इस परिश्रम के लिए उसे लाखों रूपए का कमीशन भी मिलता है, इसलिए वह आपसे बार बार कहता है कि एंजियोप्लास्टी करवा लो.

आप एक बात स्पष्ट रूप से जान लें कि एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन किसी का भी कभी भी सफल नहीं होता है, क्योकि डॉक्टर जो स्प्रिंग दिल की नली में डालता है, वह बिलकुल पेन की स्प्रिंग की तरह का होता है और कुछ ही महीनो में उस स्प्रिंग की दोनों साइड आगे व पीछे फिर से कोलेस्ट्रोल व फेट जमा होना शुरू हो जाता है.

अब फिर से इससे बचाव के लिए अमेरिका की कई बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां भारत में दिल के रोगियों को अरबो रुपयों की दवाईयां बेच रही हैं. इनके प्रभाव में आकर डॉक्टर भी आपको निम्न कई तरह की दवाइयों के जाल में फंसा देता है –

  1. कोलेस्ट्रोल कम करने की गोली,
  2. ह्रदय को सुचारू (?) रूप से चलाने की गोली,
  3. खून की नली की चोकिंग से खून के प्रवाह में रुकावट न आये, इसलिए खून पतला करने की गोली,
  4. बी.पी. की गोली,
  5. दवाइयों के साइड-इफेक्ट से हो गयी डायबटीज की गोली,
  6. इन दवाइयों को पचाने की और इनसे होने वाली एसिडिटी से बचाव की गोली,
  7. इन दवाइयों से हो रही कमजोरी के लिए मल्टी-विटामिन की गोली,

उपरोक्त दवाइयों में से आपको कोई दवा एक बार, तो कोई दवा दो बार लेनी पड़ती है. इस तरह आपको रोज 12 से 15 गोली लेनी पड़ती है और आपका शरीर अब इन दवाइयों के असर से लड़खड़ाने हुए चलने लगता है.

साथ ही आप और आपकी पत्नी या पति डरे हुए भी रहते हैं कि अगर फिर से दिल की नली चोक हो गयी, तो आपको हार्ट अटेक आने की संभावना बढ़ जायेगी.

ये दवाइयां आपको आजीवन लेनी पड़ती हैं. कुछ सालों बाद किसी भी छोटी सी परेशानी होने पर डॉक्टर फिर से कहता है कि एंजियोप्लास्टी करवाओ. इस तरह आपके लाखो रूपए लुटते हैं और आपकी जिंदगी इसी तरह से परेशानी और उलझन में ख़त्म हो जाती है.

इस तरह डॉक्टर-हॉस्पिटल-मल्टीनेशनल कंपनियों के त्रिदोष का यह त्रिकोण हमारे देश में खूब फल-फूल रहा है और हमारे देश के हजारों करोड़ रूपये यह त्रिकोण हड़प रहा है.

इस त्रिकोण की हर भुजा दूसरी दोनों भुजाओं की मदद कर रही है और उन्हें सहारा दे रही है.

इस त्रिकोण ने पूरे देश को जकड़ लिया है. क्या आप इस त्रिकोण के चक्रव्यूह से छूटना चाहेंगे?

अगर आप अपने आप को ऐसी लाचारी और परेशानी से बचाना चाहते हैं, तो कृपया निम्न बातों का ध्यान रखें –    

अक्सर किसी भी पुरु का अधिक से अधिक से अधिक 45 वर्ष और महिलाओं का 55 वर्ष की उम्र के बाद ह्रदय कमजोर होने लगता है.

लेकिन ऐसी किसी भी परिस्थिति में आप घबडाये नहीं और जब भी चक्कर आयें, घबराहट लगे या पसीना बहुत आये, तब तुरंत ही अपने पर्स या वालेट से बायोकाम्ब नं. 27 की छः-छः गोली की पुड़ियाँ निकाल हर दो-दो मिनिट में जबान के नीचे रख कर चूसते रहें.

विश्वास कीजिये कि ऐसा करने से आपका दिल का दौरा होना निश्चित ही थम जाएगा और रक्त संचालन भी नियमित हो जायेगा.

साथ ही ऐसी हालत में आप हर एक-एक मिनिट में जोर जोर से खांस ले और जोर की सांस लेते रहें. इस तरह जोर की खांसी लेने से दिल की गति को सामान्य होने में मदद मिलती है.

अगर आप चाहते हैं कि ऐसा आकस्मिक ह्रदयाघात आपको कभी भी न हो, तो आप इस उम्र में ह्रदय की मांसपेशियों को ताकत देने के लिये, कोलेस्ट्रॉल लेवल को सही रखने के लिये, ह्रदय को मजबूती प्रदान करने के लिये, सांस फूलने से रोकने के लिये, रक्त धमनियों में जमा रुकावट को धीरे-धीरे कम करने के लिये एवं अन्य इसी तरह के कई अन्य ह्रदय रोग और विकारों को रोकने के लिये निम्न उपचार लें.

 

  1. सबसे पहले आप सुबह 7 बजे कुल्ला करके सल्फर 200 को, फिर दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को खाने के एक से दो घंटे बाद या नौ बजे नक्स वोम 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से एक हफ्ते तक ले
  2. Arjuna Q, Crataegus Ox Q और Cactus G Q; इन तीनो को मिलाकर 20-20 बूँद औबह और रात्रि को 9 बजे आधा कप पानी में डालकर रोज तीन माह तक ले, फिर इसे एक बार रात्रि में लम्बे समय तक या आजीवन लेने से किसी भी प्रकार की ह्रदय, केलोस्ट्राल और ब्लड प्रेशर से सम्बंधित समस्याएं नहीं होंगी.
  3. बायोकाम्ब नं. 27 की छः-छः गोली दिन में चार बार लम्बे समय या आजीवन चूसते रहें. 
  4. साथ ही बायोकाम्ब नं. 27 की छः-छः गोली की आठ-दस पुड़ियाँ बना कर अपने पर्स या वालेट में रख लें और जब भी दौरा सा लगे, किसी भी तरह की घबराहट हो, चक्कर आयें या पसीना बहुत आये, तब इन्हें हर दो-दो मिनिट में जबान के नीचे रख कर चूसते रहें.
  5. विश्वास कीजिये कि ऐसा करने से आपका दिल का दौरा निश्चित ही रुक जाएगा और जब आप डॉक्टर के पास जाकर जांच करवाएंगे, तो उन्हें दिल की गति सामान्य ही मिलेगी.
  6. जब भी आप घर में हों और अगर हार्ट अटेक सा लगे तथा तेज दर्द हो रहा हो, तो HSL कम्पनी की ANGIO DROPS की दस बूँद हर दस-दस मिनिट में दें. इसे पहले से ही लाकर घर में रखे रहें.
  7. जो भी लोग ह्रदय और अन्य रोगों से पीड़ित हैं और अंग्रेजी दवाइयां ले रहे हैं, वे उन्हें एक दम से बंद न करें और उपरोक्त इन दवाइयों को तीन माह तक लेने के बाद अपने डॉक्टर की सलाह से ही आप उन्हें धीरे-धीरे कम कर सकते हैं. इंजेक्शन तथा विषैली औषधियों से भी बचे.

 

  • शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग –

 

हमेशा स्वस्थ रहने के लिए कोई भी व्यक्ति या परिवार अगर निम्न उपचार द्वारा अपने शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग करता है और खान-पान तथा एक्सरसाइज भी निम्न अनुसार लेता है, तो उसे कभी भी कैंसर, डायबटीज, ह्रदय रोग, लिवर रोग, किडनी फेल्यर, टी.बी., फेफड़े के रोग, चर्म रोग आदि कोई भी गंभीर बीमारी नहीं होगी और वह आजीवन सपरिवार स्वस्थ, प्रसन्न और खुशहाल रह सकेगा

  1. सबसे पहले आप सुबह 7 बजे कुल्ला करके सल्फर 200 को, फिर दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को खाने के एक से दो घंटे बाद या नौ बजे नक्स वोम 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से एक हफ्ते तक ले, फिर हर तीन से छह माह में तीन दिन तक लें.
  2. इन दवाइयों को लेने के एक हफ्ते बाद हर 15-15 दिन में सोरिनम 200 का मात्र एक-एक पांच बूँद का डोज चार बार तक ले, ताकि आपके शरीर के अंदर जमा दवाई और दूसरे अन्य  केमिकल और पेस्टीसाइड के विकार दूर हो सकें और आपके शरीर के सभी ह्रदय, फेफड़े, लीवर, किडनी आदि मुख्य अंग सुचारू रूप से कार्य कर सकेंगे. बच्चों और ज्यादा वृद्धों में ये सभी दवा 30 की पावर में दें.
  3. अगर कब्ज रहता हो, तो होम्योलेक्स या HSL कम्पनी की होम्योकाम्ब नं. 67 की एक या आधी गोली रोज रात एक सफ्ताह तक 9.30 बजे लें. इसके बाद हर व्यक्ति को चाहिए कि वह इसे हर हफ्ते एक या आधी गोली रात्रि 9.30 बजे ले.
  4. आप सुबह दो से चार गिलास कुनकुना पानी पीकर 5 मिनिट तक कौआ चाल (योग क्रिया) करें.
  5. साथ ही पांच या अधिक से अधिक दस बार तक सूर्य नमस्कार करें. फिर 200 से 500 बार तक कपाल-भांति करें. इसके बाद प्राणायाम करें.
  6. रोज सुबह और रात को 15-15 मिनिट का शवासन भी करें.
  7. फिर एक घंटे बाद अगर सूट करे, तो कम से कम एक माह तक नारियल पानी लें. या फिर इसे दोपहर चार बजे भी ले सकते हैं.
  8. सुबह और शाम को अगर संभव हो, तो एक घंटा अवश्य घूमें.
  9. रात को सोते समय अष्टावक्र गीता में बताये अनुसार दो मिनिट के लिए “मैं स्वयं ही तीन लोक का चैतन्य सम्राट हूँ” ऐसा जाप करें.
  1. उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के चार्ज किये और मिलाकर बने चुम्बकित जल को लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में रोज दिन में 3 बार उपयोग करें.
  2. रोज सुबह उच्च शक्ति चुम्बकों को हथेलियों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए लगायें और रात्रि को खाने के दो घंटे बाद पैर के तलुवों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए दक्षिणी चुम्बक को बायीं ओर और उत्तरी चुम्बक को दाहिनी ओर लगाये.
  1.    \\गेंहू, जौ, देसी चना और सोयाबीन को सम भाग मिलाकर पिसवा ले और उसकी रोटी सादे मसाले की रेशेदार सब्जी से खाएं. दाल का प्रयोग कम कर दें. 
  2. बारीक आटे व मैदे से बनी वस्तुएं, तली वस्तुएं एव गरिष्ठ भोजन का त्याग करे।
  3. सुबह-शाम चाय के स्थान पर नीबू का रस गरम पानी में मिला कर पिएं।
  4. खाने में सिर्फ सेंधे नमक का प्रयोग करें.
  5. रात को सोने से पहले पेट को ठण्डक पहुँचायें। इसके लिए खाने के चार घंटे बाद एक नेपकिन को सामान्य ठन्डे पानी से गीली करके पेट पर रखें और हर दो मिनिट में पलटते रहें. 15 मिनिट से 20 मिनिट तक इसे करें.
  6. मैथी दाना 250 ग्राम, अजबाइन 100 ग्राम और काली जीरी 50 ग्राम को पीस कर इस चूर्ण को कुनकुने पानी से रात्रि 9.30 बजे एक चम्मच लें.
  7. रात्रि को खाना और जमीकंद खाना, शराब पीना व धूम्रपान अगर करते हों या तम्बाखू खाते हों, तो इन्हें बंद करें. शाकाहारी भोजन ही लें.
  8. अपने शरीर की सालाना ओवरहालिंग के लिए साल में एक बार अपने आसपास के किसी भी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में जाकर वहां का दस दिन का कोर्स करें.
  9. अपने घर के बुजुर्ग लोगों की रोज एक घंटे के लिये सेवा और मदद करें.
  10. अपने आसपास की झोपड़पट्टी में रहने वाले किसी गरीब व्यक्ति की हर हफ्ते जाकर मदद करें.
  11. अध्यात्मिक कैप्सूल के रूप में मेरी पुस्तक मुक्तियाँ की एक-एक मुक्ति तीन माह तक रोज पढ़ें. इससे आपकी नेगेटिव एनर्जी कम होगी और पॉजिटिव एनर्जी बहुत तेजी से बढेगी.
  12. मेरी स्वस्थ रहे, स्वस्थ करें, मुक्तियाँ और अन्य कई पुस्तकों को मेरे Samadhan समाधान ग्रुप से निशुल्क डाउन लोड करें. आप चाहे तो अपना email address मेरे मेसेज बाक्स में दे दे, तो मैं आपको डायरेक्ट मेल कर दूंगा.
  13. होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब नम्बर से मिलती हैं. इनके नम्बर ध्यान से लिखें. साथ ही होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब में कन्फ्यूज न हों. इन्हें साफ़-साफ़ लिखें.
  14. किसी भी गंभीर मरीज को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को तत्काल दिखायें.
  15. होम्योपैथी की दवाइयों को मुंह साफ़ करके कुल्ला करके लेना चाहिए. इनको लेते समय किसी भी तरह की सुगन्धित चीजों और प्याज, लहसुन, काफी, हींग और मांसाहार आदि से बचे और दवा लेने के आधा घंटा पहले और बाद में कुछ न लें.
  1. हर दिन नई एलोपथिक दवाइयां बन रही हैं और अधिकांश पुरानी दवाइयों के घातक और खतरनाक परिणामों के कारण इन्हें कुछ ही वर्षों में भारत को छोड़ कर विश्व के कई देशों में बेन भी किया जा रहा है.
  2. हमें भी चाहिये कि हम मात्र एलोपथिक दवाइयों पर ही निर्भर न रहकर योगासन, सूर्य किरण भोजन, अमृत-जल या सूर्य किरण जल चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, बायोकेमिक दवाइयाँ आदि निर्दोष प्रणालियों को अपना कर खुद और अपने परिवार को सुरक्षित करें.
  3. इस तरह दवा मुक्त विश्व का निर्माण करना ही हमारा एकमात्र उद्देश्य है और इसके लिए आप सभी का सहयोग चाहिये, जो आप मेरे इन सन्देशों को दूर-दूर तक फैला कर मुझे दे सकते हैं.
  4. मेरी सभी स्वास्थ्य सम्बन्धी, लोक कल्याण, मानवाधिकार और आध्यात्मिक पोस्ट और पुस्तकों को देखने और उन्हें डाउनलोड करने के लिए आप मेरे ग्रुप “Samadhan समाधान” से जुड़ सकते हैं.