महाशिवरात्रि पर्व मंगलमय हो

आप सभी जानते ही हैं कि लोक कल्याणकारी और मोक्ष-फल-प्रदाता महाशिवरात्रि का यह पर्व कोटि-कोटि वर्षों से आजतक मनाया जा रहा है.

वर्तमान के इस सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग की काल संरचना के प्रथम काल पुरूष तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को ही सभी शास्त्रों में लोक कल्याणकारी और शिव पद या मोक्ष पद का प्रदाता कहा गया है.

भगवान ऋषभदेव को ही आदि पुरुष या आदिनाथ स्वामी के नाम से भी संबोधित किया जाता है.

भगवान ऋषभदेव का सूचक चिन्ह बैल है जो कि प्रकारांतर से नंदी के रूप में लोक कल्याणकारी शिवजी की सवारी भी कहलाता है.

इसलिए ऋग्वेद और यजुर्वेद के कई अध्यायों में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव को ही आदिदेव के रूप में पूज्यनीय और वन्दनीय बताया गया है. 

भागवत के पंचम अध्याय में भी ऋषभावतार और उनके लोक कल्याणकारी और शिव या मोक्ष प्रदाता स्वरुप का बहुत ही विस्तृत वर्णन किया गया है.

ऐसे पुराण पुरुष और जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का शिव-पद में आरोहण या मोक्ष में गमन जब माघ कृष्ण चतुर्दशी को हुआ, तब उस दिन मनुष्य, विद्याधर और देवताओं ने बहुत उत्सव के साथ इस दिन को मनाया था.

फिर रात्रि हो गयी, लेकिन तब भी उत्सव ख़त्म नहीं हो पाये, तब देवताओं ने उस रात्रि में भी उत्सव मनाये थे.

तब से ही संसार में वह रात्रि महाशिवरात्रि के नाम से जानी और मनायी जा रही है और आज भी हम उसे श्रद्धा और उत्साह से मना रहे हैं. 

आप सभी से भी अनुरोध है कि इस महाकल्याणकारी महाशिवरात्रि को आप भी शिव पद या मोक्ष पद को प्राप्त करने की भावना रखते हुए लोक कल्याण पूर्वक मनायेंगे, तो आपको भी आपके चैतन्य सम्राट की अवश्य ही प्राप्ति होगी.

आप सभी का कल्याण हो तथा आप सभी परिवार सहित सुखपूर्वक रहें.

इस महाकल्याणकारी महाशिवरात्रि  महापर्व की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं.