• चतुर्मुखी सनातन धर्म को सम्पूर्ण विश्व में फैलायें –

धर्म धृ धातु से बना हुआ है जिसका अर्थ होता है – धारण करना.
अतः जो आप हो, ऐसे अपने चतुर्मुखी सनातन धर्म का प्रतिपादन करने वाले शाश्वत चैतन्य स्वरुप आत्मदेव को जानना, मानना और धारण करना ही सनातन धर्म कहलाता है.
सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो देश, समय, समाज, सम्प्रदाय, आस्था, काल, पुनर्जन्म आदि की सभी सीमाओं के पार जाकर मनुष्यों के साथ-साथ पशु-पक्षी यानी कि प्राणीमात्र में भी पाया जाता है.
इसलिए हम इस सनातन धर्म को शाश्वत, सनातन, अजर, अमर, सुखदायक तथा निर्मल मानते हैं.
सनातम धर्म ही एक ऐसा धर्म है, जिसके किसी न किसी अंग या रूप को हर देश, हर सम्प्रदाय के लोग अभी भी मानकर उसका पालन करते रहते हैं.
सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो अलग-अलग देशों में विभिन्न धर्मों में किसी न किसी रूप में पाया ही जाता है.
सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो अलग-अलग देशों के विभिन्न रीति-रिवाज तथा आस्थाओं के साथ भी हर समय पाया जाता है.
सनातन धर्म हमारा एक ऐसा स्वभाव धर्म है जो अनादिकाल से है, अभी भी है और आगे आने वाले अनंत काल में भी रहेगा.
सनातम धर्म ही वह राम नाम की छतरी है, जिससे हर युग में लोक कल्याण होता आ रहा है.
इस तरह सनातन धर्म ही एक ऐसा स्वभाव धर्म है जिसका पालन हम हर पल, हर दम यानी कि प्रति दिन 24 घंटे करते रहते हैं.
सनातन धर्म हमारे हर जन्म में हर समय, हर पल हमारे ही साथ रहता है.
अतः अपने सभी अपने सांसारिक कर्तव्यों का पालन करना ही सनातन धर्म कहलाता है.
लोक कल्याण या जन हित के कार्यों को करना ही सनातन धर्म कहलाता है.
हमारा यह सनातन धर्म पशु-पक्षियों की योनी या जन्म में भी उनको प्रेरणा देता रहता है.
पशु-पक्षी भी अपने परिवार, कुल और सम्प्रदाय में रहते हुए एक-दूसरे की मदद करते हुए इस सनातन धर्म का पालन करते रहते हैं.
सनातन धर्म को मानने से हमे वर्तमान में हमारे आसपास फ़ैल रहे घृणा, वैमनस्य, बैर-भाव तथा मनमुटाव को ख़त्म करने में मदद मिलेगी.
सनातन धर्म को मानने से हमे हमारे आसपास भाईचारा-प्रेम तथा आपसी विश्वास को स्थापित करने का मार्ग मिलता है.
सनातन धर्म अपनाने से आतंकवाद पर भी अंकुश लग सकता है.
अगर आप किसी भी बेबस, बीमार, कमजोर, लाचार और दुखी व्यक्ति या प्राणी को अपने परिवार का अंग मानकर उनकी मदद करते हैं, तो आप उस समय अपने सनातन धर्म का ही पालन कर रहे होते हैं.
सनातन धर्मी प्रत्येक व्यक्ति को इस अति सुंदर शश्य श्यामल माँ वसुंधरा की संतान मानकर उससे अपने परिवार के लालन-पालन तथा भरण-पोषण के सभी अवसर प्रदान करता है.
सनातन धर्मी प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार या नौकरी के समान अवसर उपलब्ध करवाता है.
सनातन धर्मी प्रत्येक व्यक्ति को आपसी विश्वास, सामंजस्य तथा सम्मान की भावना रखने की प्रेरणा देता है.
सनातन धर्मी प्रत्येक व्यक्ति को अभय, आश्रय, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और आजीविका दिलवा कर ससम्मान रहने के अवसर देता है तथा माँ वसुंधरा की सभी संतानों को पोषण, आश्रय, विश्राम और ममत्व प्रदान करता है.
विश्व की सभी महान शक्तियां जैसे कि सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी, पवन, नदियाँ, समुद्र, वृक्ष आदि की तरह ही सनातन धर्मी भी निःस्वार्थ भाव से प्रत्येक व्यक्ति का लालन-पालन और पोषण करता है.
फिर आप भी इन महान शक्तियों के समतुल्य होकर पामर से परमात्मा बन सकेंगे.
इस तरह से सनातन धर्मी पात्र-अपात्र की चिंता किये बिना प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक प्राणी की निस्वार्थ भाव से शक्ति, स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा संबल प्रदान करता है.
इसलिए सभी दीन-दुखी, लाचार, बीमार, परेशान लोगो की मदद कर उनमे आशा का संचार करना ही सनातन धर्म कहलाता है.
तथा सभी प्राणियों की सेवा करना ही सच्चा सनातन धर्म होता है.
अतः प्रत्येक व्यक्ति को साक्षी भाव से, वीतरागी भाव से इस सनातन धर्म को जानकर अब हमेशा इसका पालन करना चाहिये
प्रत्येक मनुष्य को चतुर्मुखी सनातन धर्म के चार अंग या सोपानों जैसे कि मातृत्व धारण, राष्ट्र धर्म, विश्व धर्म तथा आत्म धर्म के स्वरुप को जानकार, तदनुसार इनका आचरण तथा पालन करना चाहिए.
तभी आप सभी धर्मों, सम्प्रदाय तथा जाति के विरोधाभास को दूर कर सनातन धर्म के अनुयायी बन सकते हैं.
आपकी आस्था के आपके वर्तमान के दिकाई दे रहे समस्त धर्म तो इस जन्म के साथ ही ख़त्म हो जायेंगे.
अतः आप उनका तो पालन करें ही, साथ ही आपके साथ हर समय रहने वाले शाश्वत, सनातन, अजर, अमर, सुखदायक चतुर्मुखी धर्मों का भी पालन करें, ताकि आप भी शाश्वत, सनातन, अजर, अमर होकर अक्षय अनंत सुख को पा सकें.
इस संसार के समस्त प्राणियों को कलियुग या पंचम काल के अंत तक स्वयं के शुद्ध आत्म-तत्व या चैतन्यदेव या चैतन्य सम्राट को प्रतिपादित करने वाले चतुर्मुखी सनातन धर्म का ज्ञान मिलता रहे,
चतुर्मुखी सनातन धर्म का पालन करने की प्रेरणा मिलती रहे,
इसके लिए सम्पूर्ण विश्व के हर कोने में समवशरण सेवा मंदिर बनाने की हमारी योजना है.
हमारे प्रस्तावित एक हजार आठ समवशरण सेवा मंदिरों में आपको इस चतुर्मुखी सनातन आत्म धर्म का इस युग के अंत तक सतत लाभ मिलता रहेगा.
अतः अब आप भी खुद को चतुर्मुखी सनातन धर्मी माने तथा इसके चारों अंग जैसे कि मातृत्व धारण, राष्ट्र धर्म, विश्व धर्म तथा आत्म धर्म का स्वरुप जानकार इस चतुर्मुखी सनातन धर्म का पालन करें.
फिर निश्चित ही आप अक्षय अनंत सुख की प्राप्ति कर मोक्ष महल में सदा के लिए निवास करेंगे.
हमारा सनातन धर्म ही वास्तव में हमारा सच्चा शाश्वत, सनातन, अजर, अमर, सुखदायक धर्म है.
इस सनातन धर्म की चैतन्य शक्ति ही हमे समय के अनंत प्रवाह या काल-चक्र में कभी भी मरने नहीं देती है.
हमारी इस चैतन्य शक्ति से हमारे अनंत जन्म लेने पर भी हमारे चैतन्य गुणों में से कोई भी गुण हमारा कभी भी साथ नहीं छोड़ता है.
चौरासी लाख योनियों के हर भ्रमण में, हर जन्म में हमारे चैतन्यदेव के कारण ही हम अजर-अमर रहते हैं और आगे भी अजर-अमर ही रहेंगे.
यही हमारा चतुर्मुखी सनातन धर्म कहलाता है.
सनातन धर्म का अर्थ ही यह होता है कि वह किसी भी काल, परिस्थिति, योनी या जन्म में हमारा साथ न छोड़े. आगे आने वाले अनंत युगों तक भी हमारा साथ न छोड़े.
अतः यह चैतन्य-स्वभाव ही प्रत्येक प्राणी का नैसर्गिक गुण होता है, अनुपम शक्ति है, निर्मल स्वभाव है, अक्षय अनंत सुख सरोवर है. इसलिए हम इसे ही सनातन धर्म कहते हैं.
यह सनातन धर्म ही विज्ञान की हर कसौटी पर खरा उतरता है.
हर युग, हर काल में यह सनातन धर्म अक्षुण्य रहता है. कभी भी नष्ट नहीं होता है.
सनातन धर्म आपको
1. चैतन्य सम्राट बनाता है
2. कारण परमात्मा बनाता है
3. परम पारिणामिक प्रभो बनाता है
4. चैतन्य प्रभो बनाता है
5. आत्मदेव बनाता है
6. सहजानंदी बनाता है
7. शुद्ध स्वरूपी बताया है,
8. अविनाशी बनाता है
9. अजर-अमर बनाता है
10. ईश्वर बनाता है
11. जगदीश्वर बनाता है
12. त्रिलोकीनाथ बनाता है
13. सर्वज्ञ बनाता है
अगर आप भी सच्चे सनातन धर्मात्मा कहलाना चाहते हैं, तो आप सभी प्राणियों को परमात्मा माने, फिर आप भी स्वतः ही चैतन्य परमात्मा बन जायेंगे.
फिर आप भी स्वतः ही आज तक हुई सभी सिद्ध भगवंतों के समतुल्य होकर अधम से ईश्वर बन सकेंगे.
अतः आप सभी को अब साक्षी भाव से, वीतरागी भाव से इस सनातन आत्म धर्म को जानकर अब हमेशा इसका पालन करना चाहिये
तभी आप सभी धर्मों, सम्प्रदाय तथा जाति के विरोधाभास को दूर कर सनातन धर्म के अनुयायी बन सकते हैं.
आशा है अब आप भी अपने इस सनातन धर्म को पहचान कर उसका पालन करेंगे.
इस संसार के समस्त प्राणियों को कलियुग या पंचम काल के अंत तक स्वयं के शुद्ध आत्म-तत्व या चैतन्यदेव या चैतन्य सम्राट को प्रतिपादित करने वाले चतुर्मुखी सनातन धर्म का ज्ञान मिलता रहे,
चतुर्मुखी सनातन धर्म का पालन करने की प्रेरणा मिलती रहे,
इसके लिए सम्पूर्ण विश्व के हर कोने में समवशरण सेवा मंदिर बनाने की हमारी योजना है.
हमारे प्रस्तावित एक हजार आठ समवशरण सेवा मंदिरों में आपको इस चतुर्मुखी सनातन धर्म का इस युग के अंत तक सतत लाभ मिलता रहेगा.

कृपया चतुर्मुखी सनातन धर्म के चारो अंगों को विस्तार से समझने के लिए मेरे निम्न लेख देखे –
1. मातृत्व धर्म – http://muktiya.com/?p=338
2. राष्ट्र धर्म – http://muktiya.com/?p=341
3. विश्व धर्म – http://muktiya.com/?p=346
4. आत्म धर्म – http://muktiya.com/?p=348

अतः आप सभी से मेरा नम्र निवेदन है कि सम्पूर्ण संसार में इस चतुर्मुखी सनातन धर्म
के चारों अंग जैसे कि मातृत्व धारण, राष्ट्र धर्म, विश्व धर्म तथा आत्म धर्म का स्वरुप जानकार इस चतुर्मुखी सनातन धर्म का पालन करें.
फिर निश्चित ही आप अक्षय अनंत सुख की प्राप्ति कर मोक्ष महल में सदा के लिए निवास करेंगे.
अतः अगर हमे राम राज्य लाना है तो पूरे विश्व में सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करना चाहिए.
किसी भी तरह की काउंसेलिंग, बीमारी, परेशानी, कमजोरी, लाचारी, पीड़ा या आत्म-जिज्ञासा के उचित निवारण के लिए संपर्क करें –
• डॉ. स्वतंत्र जैन
अध्यक्ष, मुक्तियाँ विश्व शांति, सुख, सम्रद्धि ट्रस्ट
अध्यक्ष, अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ, इंदौर
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